Kidney failure truth

Truth Behind Kidney Failure Treatment

किडनी फेलियर के मरीजों की वास्तविकता

ऐसा देखा गया है कि अमीर और उच्च पदों पर आसीन लोगों की किडनी जल्दी फेल हो जाती है. आपलोग यह जानते हैं कि किडनी फेलियर की समस्या डायबिटीज, उच्च रक्तचाप इत्यादि की वजह से होती है लेकिन बिना किसी बिमारी के कम उम्र में भी किडनी फेलियर हो जाता है. मैं दूसरे  आर्टिकल में इसकी जानकारी दूंगा.

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि गण्यमान्य लोगों की किडनी ही क्यों फेल हो जाती है. कैसे होती है इसकी शुरुआत और क्या होता है इसका अंत.

आप यह बात जानते हैं कि जब जो लोग महत्वपूर्ण पदों  पर आसीन होते है,  उसके स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखा जाता  हैं और उसके सहयोगी भी आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं. इसके लिए उच्च पद पर आसीन लोग अपोलो, गणगाराम जैसे बड़े संस्थानों के नीचे अपना उपचार नहीं कराते. वहां के चिकित्सक भी vip का सबसे बेहतरीन उपचार करते हैं, तो फिर क्या कारण है कि उच्च पदों पर आसीन लोगों को किडनी फेलियर की समस्या ज्यादा होती है और किडनी फेलियर होने पर इनकी मृत्यु भी गरीब लोगों की अपेक्षा जल्दी होती है.

किडनी फेलियर के शुरुआती समय में लोगों के पेशाब से प्रोटीन निकलना शुरू होता है, उस समय उस व्यक्ति का किडनी ठीक रहता है. क्योंकि वह व्यक्ति काफी vip होते हैं इसलिए उनको नेफ्रोलोजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ ) की सुविधा तुरंत मिल जाती है. अमूमन ऐसा हरेक vip अथवा गण्यमान्य के साथ होता है कि उन्हें Superspecialist चिकित्सा तुरंत ही मिल जाती है.

किडनी विशेषज्ञ (नेफ्रोलोजिस्ट) को किडनी के रोगों की विस्तृत जानकारी रहती है इनका मानना है कि उच्च रक्तचाप और डायबिटीज की वजह से किडनी फेलियर होता है. पिछले कई वर्षों से ये विशेषज्ञ इसके सिवाय कुछ और सुनना नहीं चाहते.

किडनी को बचाने के लिए जो सुझाव यह बताते हैं वह है इन्सुलिन, उच्च रक्तचाप की दवा पूर्ण डोज में देना. इसके अलावा खान पान में बदलाव जैसे कोई भी चीज कच्चा नहीं खाना क्योंकि इससे पोटैशियम बढ़ने की संभावना रहती है. इसके अलावा प्रोटीन युक्त भोजन जैसे पनीर और स्वस्थ्य-बर्धक रिफाइंड तेल में शब्जी बनाकर खाना इत्यादि इत्यादि.

आप यह बात जानकार हैरान हो जायेंगे कि किडनी विशेषज्ञ की सभी सलाहों की वजह से ही किडनी फेलियर जल्दी हो जाता है. अब में आपको इसे प्रमाणित करना चाहता हु कैसे ?

सबसे पहले हम इन्सुलिन की बात करते हैं- ऐसा अनुसंधानों में कई वर्ष पहले साबित हो चूका है कि इन्सुलिन की वजह से किडनी फेलियर होता है.  वैज्ञानिक सबूत लिंक में देखें  इन्सुलिन से होता है किडनी फेलियर

डायबिटीज की दवाएं भी शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ते हैं इसलिए कोई भी डायबिटीज की दवा से किडनी फेलियर हो जाता है. यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक गण्यमान्य लोग जल्दी किडनी फेलियर का शिकार बनते हैं.

किडनी फेलियर के शुरुआती वक्त में ही व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ जाता है और उसे रक्तचाप की वजह से किडनी फेल होना बता दिया जाता है. असल में रक्तचाप पहले नहीं बढ़ता . किडनी फेल होने के बाद ही रक्तचाप बढ़ता है.

असल में किडनी फेलियर होने पर आपका शरीर इस समस्या के समाधान के लिए रक्तचाप बढ़ता है, क्योंकि रक्तचाप के बढ़ने से पेसाब की मात्रा बढाई  जा सकती है और आपका शरीर किडनी को ठीक करने की कोशिश करता है . रक्तचाप का बढ़ना एक बचाव प्रक्रिया है ना की बिमारी .

इस तरह हम देखते हैं कि रक्तचाप की दवा देकर जितनी भी कोशिश की जाए रक्तचाप नियंत्रित नहीं हो सकता परन्तु इससे शरीर की बचाव प्रक्रिया बाधित हो जाती है और इससे किडनी फेलियर की प्रक्रिया और तीव्र हो जाती है.

इस तरह आप देखते है की डायबिटीज और उच्च रक्तचाप को दवाओं से कण्ट्रोल करने के चक्कर में लोग किडनी फेलियर का शिकार हो रहे हैं. जाहिर सी बात है गण्यमान्य लोगों को विशेषज्ञ की सुविधा जल्दी मिलने से उनकी किडनी और जल्दी फेल हो जाती है .

आप जितना ज्यादा अच्छी तरह रक्तचाप और शुगर को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे उतनी ही जल्दी आपको किडनी फेलियर का शिकार होना पड़ेगा.

किडनी विशेषज्ञ का डाइट चार्ट किस तरह किडनी फेलियर का कारण बनता है: आप इन्टरनेट पर सर्च करके आसानी से जान जाते हैं कि पनीर, दूध का बना सामान, कैल्शियम की गोली, गेहूं का बना कोई भी चीज, रिफाइंड तेल की वजह से होता है किडनी फेलियर.  और यह सभी चीजें किडनी विशेषज्ञ के डाइट चार्ट में होता है. इस तरह आप देख रहे हैं कि दवाईयों और डाइट चार्ट दोनों की वजह से गण्यमान्य लोगों की किडनी सामान्य लोगों से जल्दी खराब हो जाती है .

किडनी खराब होने की मुख्य वजह infalammation है जोकि biopsy से पता चलता है जैसे peri-tubular nephritis, para tubular nephritis, Ig A nephritis इत्यादि.

Biopsy में अलग अलग किडनी के पार्ट्स का infalmmation ही बताया जाता है. इन सभी inflammation की वजह भोजन के मौजूद टोक्सिन और पोषक तत्वों की कमी होती है, जिसका किडनी विशेषज्ञ कुछ नहीं करते.

किडनी का इलाज वास्तव में एक उद्योग है जिसमे शामिल है ट्रांसप्लांट और डायलिसिस.

किडनी उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है नेफ्रोलोजिस्ट. कोई भी उद्योग तभी चलता है जब उसमे प्रॉफिट हो. जाहिर सी बात है जब लोग लाइलाज होंगे, जब लोगों की किडनी ज्यादा खराब होगी और मौत के सौदागर पर इनका भरोसा होगा तभी यह उद्योग ज्यादा मुनाफा कमाएगा और यह उद्योग प्रगति करता रहेगा.

औसतन एक ट्रांसप्लांट में 20 से 50 लाख आप देते हैं. 5 साल डायलिसिस कराने प्रति माह 50000 यानि कुल 25 लाख और किडनी उद्योग को फीस के तौर पर देते हैं. जबकि मेटाबोलिक उपचार में 4000 प्रति माह खर्च होता है जो लगभग 5 वर्ष में 2 से 3 लाख होता है. आप खुद भी समझ सकते हैं कि कोई भी व्यापारी को कौन से प्रोसीजर को बढ़ावा देना चाहेगा.

सिर्फ और सिर्फ प्रॉफिट मोटिव से चलता है यह उद्योग. ऐसा नहीं है कि नेफ्रोलोजिस्ट को नहीं मालुम है कि ट्रांसप्लांट अथवा डायलिसिस से बेहतर है मेटाबोलिक उपचार. जो बात डॉ. विजय राघवन ने अपने 5 वर्ष के प्रैक्टिस में खोज निकाला, वह बात उन्हें नहीं मालुम हो.

चलो मान लिया उनको नहीं मालूम  तो फिर डॉ. विजय राघवन से पूछते क्यों नहीं अथवा कोई कानूनी कारवाही क्यों नहीं कराई जाती. क्यों है पूरा चिकित्सा संस्थान के लोग चुप्पी साधे.

Dialysis कराने से व्याक्ति का खून धीरे धीरे घटता जाता है ज्यादातर लोग 2 वर्ष से ज्यादा जिन्दा नहीं बचते. ट्रांसप्लांट के बाद जो दवाई दी जाती है उससे किडनी फेलियर होता है और औसतन 2 से 3 वर्ष की जिंदगी मिलती है इसके बाद पुनः ट्रांसप्लांट अथवा डायलिसिस की सलाह दी जाती है. इन दोनों ही प्रक्रियाओं में जीवन काफी दुखमय रहता है. जबकि मेटाबोलिक उपचार से व्यक्ति आजादी का सुखमय जीवन व्यतीत करता है और लम्बी जिंदगी जी सकता है.

आपको यह बात जानकार हैरानी होगी कि किडनी उद्योग नहीं है आपके दुखों की वजह. किडनी संस्थान के लोग, चिकित्सक और कर्मचारी कभी भी नहीं कहते कि आपकी किडनी ठीक होगी अथवा आप ज्यादा दिन जिन्दा रहेंगे. सभी लोग आपको बताते हैं कि ट्रांसप्लांट अथवा डायलिसिस अथवा दवाईयों से भी आपका स्वस्थ्य गिरता जाएगा और आपकी दर्दनाक मृत्यु हो जायेगी. फिर भी पढ़े लिखे लोग भी वही उपचार अपनाते हैं.

चिकित्सा एक व्यापार है. सही बात बोलकर वह कर रहे हैं व्यापार तो फिर कानूनी रूप से वह कहाँ गलत हैं. अगर कोई आपकी बदहाली के लिए जिम्मेदार है तो वह है आप खुद, आपका अंतर्मन.

हरेक व्यक्ति का अंतर्मन उसकी वास्तविकता निर्धारित करता है. वर्षों पहले लोगों को मालूम था कि मृत्यु ईश्वर देता है और जीवन के अंतिम समय में वह ईश्वर की पूजा और साधना किया करते थे जिससे उसकी आनंददायक मृत्यु हुआ करती थी.

व्यक्ति का अंतर्मन बार बार दोहराई जाने वाली चीजों अथवा बातो के अनुसार कार्य करता है उसी से उसकी जिंदगी निर्धारित होती है. जैसे अगर कोई किडनी का मरीज उपचार के लिए जाता है तो बार बार सुनकर वह जान जाता है कि उसकी मृत्यु किडनी फेलियर से होगी. उसका अंतर्मन उसके मृत्यु का निर्धारण उसी के अनुसार करने लगता है. जब वह व्यक्ति पहली बार डायलिसिस कराता है तो उसे पूर्णतः भरोसा हो जाता है कि उसकी जिंदगी अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी क्योंकि डायलिसिस की प्रक्रिया में उसका शरीर इतना कष्ट झेलता है कि उसे लगभग मृत्यु का आभास हो जाता है.

व्यक्ति का अंतर्मन मौत का प्रोग्राम निर्धारित कर लेता है और उसका अंतर्मन बार बार उसे डायलिसिस केंद्र की ओर ले जाता है ठीक उसी तरह वर्षों पहले मृत्यु से पहले लोग साधना किया करते थे. मृत्यु के प्रोग्राम में व्यक्ति का अंतर्मन दुखी शरीर का अंत करने के लिए बार बार मृत्यु के पथ पर चलता है, यह एक ऐसी वास्तविकता है जो लाखों वर्षों से चला आ रहा है. इसलिए अगर डायलिसिस अथवा ट्रांसप्लांट से बचने के लिए कोई सलाह देता है तो उसका अंतर्मन तुरंत ही वैसी बातों को अस्वीकार कर देता है और दुखी  और बीमार व्यक्ति सही सलाह देने वालों से दूरी बना लेता है.

ऐसे में आम लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि अच्छी चीजों का प्रचार करे और अपने आस पास किडनी के मरीजों और उसके परिवार के लोगों को सही मार्गदर्शन करें. अगर आप ऐसा करेंगे तो फिर आपभी और आपके परिवार के लोग इस निर्दयी व्यापार से बच पायेंगे.

धीरे धीरे लोगों की वास्तविकता बदल सकेगी और इंसान वर्षों पहले जैसे सुखमय मौत को अपना पायेगा. ईश्वर की गोद में एक सुखमय अंत. जिसका हरेक व्यक्ति को अधिकार होना चाहिए. आज व्यक्ति कम उम्र में ही जीवन के अंत की बात करने लग जाता है, और उसका अंतर्मन मौत का प्रोग्राम बनाने लग जाता है जबकि ईश्वर की गोद में सुखमय मौत 100 वर्ष के बाद ही होती थी.

व्यापार के चंगुल से खुद को और इंसानियत को बचाने में आप हमारा साथ दें. आपको सुखद अनुभूति होगी.

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