kidney transpalnt

Kidney Transplant

किडनी ट्रांसप्लांट एक असफल पद्धति क्यों?

Transplant failure rate in USA: 7% failure within 1 year, 17% failure within 3 years, 46% failure within 10 years, 20% re-transplantation rate 

प्रायः किडनी फेलियर के मरीज समझते हैं कि ट्रांसप्लांट कराने से वह सामान्य जीवन जी लेंगे परन्तु ऐसा प्रायः नहीं होता. ट्रांसप्लांट उन्हीं लोगों का होता है जो पूर्णतः स्वस्थ हैं, ज्यादातर लोग मसलन 99 % किडनी के मरीज ट्रांसप्लांट के लायक ही नहीं होते.

A kidney transplant is a treatment for kidney failure; it’s not a cure. You will need to take medicines every day to make sure your immune system doesn’t reject the new kidney . You will also need to see your health care provider regularly.

A working transplanted kidney does a better job of filtering wastes and keeping you healthy than dialysis. However, a kidney transplant isn’t for everyone. 

Treatment better than Transplant 

What are the possible problems after a kidney transplant?

The donated kidney may start working right away or may take up to a few weeks to make urine. If the new kidney doesn’t start working right away, you’ll need dialysis treatments to filter wastes and extra salt and fluid from your body until it starts working.

Other problems following kidney transplant are similar to other pelvic surgeries and may include

  • bleeding
  • infection, especially a bladder infection
  • hernia
  • pain or numbness along the inner thigh that usually goes away without treatment

Transplant rejection is rare right after surgery and can take days or weeks to occur. Rejection is less common when the new kidney is from a living donor than when it’s from a deceased donor.

किडनी डोनेट करना खतरनाक निर्णय है

जो लोग किडनी डोनेट करते हैं उन्हें भी काफी रिस्क रहता है. प्रायः वह आम लोगों की तरह जिंदगी नहीं जी पाते. 

A University of Minnesota study has clearly shown that donors who develop diabetes or hypertension post-donation have a 4-fold higher risk of proteinuria and a >2-fold higher risk of end-stage renal disease .

डायलिसिस से कितने वर्ष जिन्दा रहा जा सकता है

डायलिसिस के सहारे अमेरिका में औसतन 3 वर्ष जिन्दा रहते हैं  और भारत में औसतन अवधि एक वर्ष से कम है, जबकि हमारे उपचार से अमेरिका में लोग वर्षों जिन्दा हैं. Read More

हमारे उपचार की सफलता दर

हमारे उपचार से व्यक्ति प्रसन्नचित्त और सुखी जीवन जीता है. विदेशों में इस उपचार से लोग 10 से 20 वर्षों से प्रसन्नचित जिन्दा हैं और सुखी हैं. हमारे उपचार को अपनाकर डायलिसिस के झंझट से छुटकारा मिल जाता है और ट्रांसप्लांट भी नहीं करानी पड़ती है. अगर ठीक ढंग से उपचार अपनाया जाय तो किडनी फेलियर का मरीज बिना किसी डायलिसिस अथवा ट्रांसप्लांट के लम्बी जिन्दगी जी लेता है. लगभग सभी तरह के मरीज में कारगर है यह उपचार.

डायलिसिस लेने से अचानक मृत्यु की संभावना बहुत ज्यादा है और इससे औसतन एक वर्ष जीने की संभावना रहती है जबकि अमेरिका जैसे देशों में तीन वर्ष तक औसतन लोग जी लेते हैं. डायलिसिस कराने पर धीरे-धीरे शरीर में खून की कमी हो जाती है और डायलिसिस के द्वारा शरीर से प्रोटीन और पोषक तत्व भी बहार निकल जाते हैं, जिसकी भरपाई नहीं हो पाती. क्योंकि यह सब पोषक तत्व और प्रोटीन लीवर में बनता है और डायलिसिस कराने से यह जितनी जल्दी बाहर निकल जाते हैं उतनी जल्दी इनका शरीर में निर्माण नहीं हो सकता. इन सब कारणों से डायलिसिस का मरीज धीरे धीरे खराब स्थिति में पहुँच जाता है.

प्रायः किडनी फेलियर के मरीज समझते हैं कि ट्रांसप्लांट कराने से वह सामान्य जीवन जी लेंगे परन्तु ऐसा प्रायः नहीं होता. Transplant failure rate in USA — 7% failure within 1 year, 17% failure within 3 years, 46% failure within 10 years, 20% re-transplantation rate. 

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